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आपके देश को बचाने के लिए हमारे कथित बुद्धिजीवी एक बार फिर से बिहार के प्रसिद्ध गाँधी मैदान में 15 अप्रैल को जमा होने वाले है| जमा होने का कारण भी एकदम दिलचस्प है, और हो भी क्यों ना सब निकले है “दीन बचाने और देश बचाने” के लिए|
इन बुद्धिजीवियों को कैसे पता चला कि अभी ही सही समय है “दीन और देश” बचाने का और अगर अभी आगे नहीं आयेंगे तो ना ही ये देश बचेगा और न ही दीन|
पटना वासियों आप एकबार फिर से तैयार रहिये जाम में फंसने के लिए|
पिछले कुछ दिनों से देश के अन्दर हो रही घटनाओं ने ये सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर इस तरह की सोच हम भारतीयों के मन में ही क्यों आती है| कभी फिल्म के नाम पर भारत बंद करना, कभी आरक्षण के नाम, पर और कभी दलित के नाम पर|
अब सोचने वाली बात ये है की इन सब भारत बंद के वजह से नुकसान किसको झेलना पड़ रहा है| जहां तक मेरे जेहेन में बात आ रही है, मेरे ख्याल से नुकसान देश को ही पहुँच रहा है| मतलब ये कि अगर हमें देश को बचाना है, तो बचाना पड़ेगा इस तरह की रैली या इस तरह के दुसरे कार्यक्रम करने वालों से|

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चलो कुछ देर के लिए मान लेते है कि आपको देश की बहुत फ़िक्र है लेकिन इस देश में तो इंसान ही रहते है ना| जब आपके बगल में ही किसी इंसान के साथ इतना बुरा होता है की वह अपनी जिंदगी बचाने के भी काबिल नहीं रहता है, जब इस देश को आपकी बहुत सख्त जरुरत होती है तब आप कहां छुप जाते हो |
क्यों आपके घर के बगल से किसी का अपहरण कर लिया जाता है, क्यों आपके किसी अपने को मौत के घाट उतार दिया जाता है, क्यों हम भाई आपस में ही धर्म और जाति के नाम पर एक दुसरे के दुश्मन बन जाते है| क्यों हम अपनों के साथ हो रहे अत्याचार को रोकने के लिए उसके साथ खड़े नहीं होते है| जब हम अपने आस पास के लोगो की हिफाजत नहीं कर सकते, तो हमें भी कोई हक़ नहीं है अपने स्वार्थ के लिए इस तरह की ढोंगी “दीन बचाओ देश बचाओ“ रैली निकालने का|
दीन के नाम पर, जाति के नाम पर, धर्म के नाम पर, राजनीतिक पार्टी के नाम पर, किसी समुदाय विशेष के नाम पर अपना स्वार्थ देखने वालों; तुमको ना ही उपर वाला माफ़ करेगा और ना ही इस देश की जनता|
पाठकों से विनम्र निवेदन है की इस पोस्ट को किसी धार्मिक पूर्वाग्रह से ना जोड़े क्योंकि देश का कोई धर्म नहीं होता है|