भागलपुर में गंदे पानी के निकास को बने नालों पर 4 साल में निगम ने जनता की कमाई पानी में बहा दी। 4 साल में 44 करोड़ 48 लाख 56,854 रुपए नगर विकास विभाग ने दिए। इतने पैसे लगने पर जनता ने उम्मीद तो यही की थी कि अब बारिश मे नालों के बहने की समस्या से छुटकारा मिलेगा पर ऐसा हुआ कुछ नहीं | मोहल्लों में बिना सर्वे और लाइन लेंथ का आकलन किए ही चैंबरों में बैठकर जिम्मेदारों ने योजना बनाई। नाले का लेआऊट बनाया और ठेकेदार ने मनमर्जी काम कर ऐसा नाला बनाया कि पूरा पैसा गंदे पानी में ही बह गया।

नतीजा, हल्की बारिश में ही नाले उफन रहे हैं। गंदे पानी के बीच लोगों का चलना दूभर है। हाल ही में 33 करोड़ के प्रोजेक्ट के टेंडर हुए हैं। इसमें भी लोकल एजेंसियाें को काम दिया गया। सोशल ऑडिट के लिए निकली एक्सपर्ट की टीम ने नालियों का मुआयना किया। उन्होंने बताया, सही नाला न बनने से दूसरे नाले खुद बन जाते हैं। इस बारिश भी लोगों को इससे परेशानी होगी। 

लोग निगरानी नहीं कर पाते 

ठेकेदार निर्माणस्थल पर कोई बोर्ड नहीं लगाता। इससे आम लोग काम की मॉनिटरिंग नहीं कर पाते। निगम अफसरों की मिलीभगत से ठेकेदार मनमर्जी करते हैं और इंजीनियर काम पूरा होते ही एनओसी दे देते हैं।

ठेकेदार पर सवाल उठाया तो अधिकार किए कम 

ठेकेदार के काम पर एक उपनगर आयुक्त ने सवाल उठाया था तो अफसर के खिलाफ गोलबंदी की। फिर नगर आयुक्त ने अफसर का अधिकार कम किया। तब से किसी ने आवाज नहीं उठाई।

कब तक जनता के पैसे यूँ नाले मे बहते रहेंगे?

अब सवाल ये उठता है कि आखिर कब तक जनता के पैसों को नेता यूँ ही उड़ाते रहेंगे ? किसी भी काम के लिये पैसों का आवंटन जब होता है तो करोड़ों रूपए से नीचे का आवंटन तो कहीं भी होता ही नहीं है | ये पैसे खर्च भी हो जाते हैं और जनता की समस्या का समाधान भी नहीं होता | अक्सर इन पैसों से नेता तथा उनके चमचे अफसर अपनी जेबों को भरते हैं | 

हर साल एक ही समस्या उभरती है, पैसे मिलते हैं और काम होने का ढोंग किया जाता है | फिर अगले साल वही समस्या फिर से आ खड़ी होती है और कोई पिछले साल हुए काम का हिसाब न तो मांगता है न ही देता है | और उसपर तारीफ़ तो यह कि यही नेता चुनाव मे हर साल वोट मांगने भी आ खड़े होते हैं | जनता मे कोई इनसे सवाल भी नहीं करता | 

नागरिकों का जागरूक होना जरूरी 

इन सब बातों पर गौर करने के बाद यही समझ आता है कि जनता का जागरूक होना सबसे ज्यादा जरूरी है | अगर जनता जागरूक हो तथा अपने नेता से सवाल पूछने की आदत डाले तो ये समस्याएँ सुलझ सकती हैं | फिर चुनाव का मौसम आ गया है | फिर से सारे नेता लोगों के पास जाना शुरू करेंगे | ऐसे मे ये जरूरी है कि जनता उन्हें इस बात का एहसास कराए कि जनता ही असली बॉस है |