भोपाल गैस त्रासदी सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक है: UN

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Bhopal Gas Tragedy 1984

भोपाल की गैस त्रासदी पूरी दुनिया के औद्योगिक इतिहास की सबसे बड़ी दुर्घटना है। तीन दिसंबर, 1984 को आधी रात के बाद सुबह यूनियन कार्बाइड की फैक्टरी से निकली जहरीली गैस (मिक या मिथाइल आइसो साइनाइट) ने हजारों लोगों की जान ले ली थी। मरने वालों की संख्या को लेकर मदभेद हो सकते हैं, लेकिन इन त्रासदी की गंभीरता को लेकर किसी को कोई शक, शुबहा नहीं होगा। इसलिए इतना ही कहना पर्याप्त होगा कि मरने वालों की संख्या हजारों में थी। प्रभावितों की संख्या लाखों में हो तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र की आई आज एक रिपोर्ट में कहा गया है कि हजारों लोगों को मौत के मुंह में धकेलने वाली 1984 की भोपाल गैस त्रासदी दुनिया की ”सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक है। रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि हर साल पेशे से जुड़ी दुर्घटनाओं और काम के चलते हुई बीमारियों से 27.8 लाख कामगारों की मौत हो जाती है।

संयुक्त राष्ट्र की श्रम एजेंसी अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य प्रदेश की राजधानी में यूनियन कार्बाइड के कीटनाशक संयंत्र से निकली कम से कम 30 टन मिथाइल आइसोसायनेट गैस से 600,000 से ज्यादा मजदूर और आसपास रहने वाले लोग प्रभावित हुए थे।

Bhopal Gas Tragedy

इसमें कहा गया है कि सरकार के आंकड़ों के अनुसार 15,000 मौतें हुई। जहरीले कण अब भी मौजूद हैं और हजारों पीड़ित तथा उनकी अगली पीढ़ियां श्वसन संबंधित बीमारियों से जूझ रही है तथा उनके अंदरुनी अंगों एवं प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचा है।

Bhopal Gas Tragedy 1984

रिपोर्ट में कहा गया है कि 1919 के बाद भोपाल त्रासदी दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक थी। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक 2 और 3 दिसंबर 1984 की रात यूनियन कार्बाइड की फैक्ट्री से करीब 40 टन गैस का रिसाव हुआ था| जानिए उस रात को हुए गैस के रिसाव से लेकर हजारों लोगों की मौत तक का पूरा घटनाक्रम|

2 दिसंबर रात 8 बजे: यूनियन कार्बाइड कारखाने की रात की शिफ्ट दो दिसंबर 1984 की रात आठ बजे पहुंच गई थी और सुपरवाइजर समेत सभी मजदूर अपने-अपने काम में लग गए थे|

2 दिसंबर रात 9 बजे: रात के करीब 9 बजे सफाई कर्मचारी सफाई करने के लिए निकलते हैं. कुछ लोग भूमिगत टैंक के पास पाइपलाइन की सफाई करने के लिए जाते हैं|

2 दिसंबर रात 10 बजे: सफाई के बाद रात 10 बजे फैक्ट्री के टैंक नंबर 610 में मिथाइल आइसोसाइनेट गैस में पानी भर गया| जिससे रासायनिक प्रतिक्रिया शुरू हो गई| इसी दरमियान टैंक का तापमान 200 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया और टैंक में गैस बनने लगी|

2 दिसंबर रात साढ़े 10 बजे: रासायनिक प्रतिक्रिया से बने दबाव को टैंक सह नहीं पाया और गैस का रिसाव होने लगा| सफाई के दौरान वाल्व ठीक से बंद नहीं हो सका था| जिसके चलते टॉवर से गैस का रिसाव शुरू हुआ|

3 दिसंबर रात 12 बज कर 15 मिनट: टैंक में मौजूद कर्मचारियों को रात करीब 12 बज कर 15 मिनट पर घबराहट महसूस होने लगी| कर्मचारियों ने वॉल्व बंद करने की कोशिश की तभी खतरे का सायरन बज गया| कई रिपोर्ट्स के मुताबिक सायरन रिसाव के काफी देर बाद बजा| जिसके कारण लोग समय रहते सतर्क नहीं हो सके थे|

Bhopal Gas Tragedy

3 दिसंबर रात 12 बज कर 50 मिनट: रात 12 बज कर 50 मिनट पर आस-पास की बस्तियों में रहने वाले लोगों को भी घुटन महसूस होने लगी| लोगों को खांसी, आंखों में जलन, पेट फूलने और उल्टी की शिकायत होने लगी थी|

3 दिसंबर रात 1 बजे: 2 और 3 दिसंबर की रात करीब 1 बजे पुलिस सतर्क हो पाती कि इलाके में भगदड़ मच गई| इसी दरमियान कारखाने के संचालक ने किसी भी प्रकार के रिसाव का खंडन किया|

3 दिसंबर रात 2 बजे: तीन दिसंबर तड़के 2 बजे अस्पताल में मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी थी| लोग तबीयत बिगड़ने के कारण घरों से बाहर की तरफ भाग रहे थे|

3 दिसंबर रात 2 बजे: रात सवा दो बजे तक पूरे शहर में जहरीली गैस फैल चुकी थी|

3 दिसंबर तड़के 4 बजे: तीन दिसंबर तड़के चार बजे तक गैस रिसाव पर काबू पा लिया गया था| लेकिन तब तक लाखों लोग इस जहरीली गैस के मरीज बन चुके थे तो हजारों दम तोड़ चुके थे|

Bhopal Gas Tragedy 1984

3 दिसंबर सुबह 6 बजे: पुलिस की गाड़ियां लाउडस्पीकर पर गैस के रिसाव की चेतावनी दे रही थीं| वहीं हजारों गैस पीड़ित लोग सड़कों पर दम तोड़ रहे थे तो कुछ लोग बदहवास होकर इधर-उधर भाग रहे थे|

Bhopal Gas Tragedy 1984

सुबह होने तक गैस के रिसाव पर तो काबू पा लिया गया| लेकिन रात भर में गैस इतना नुकसान कर चुकी थी कि हजारों लोग मौत के शिकार हो गए थे| गैस के रिसाव पर तो कुछ घंटों में ही काबू पा लिया गया लेकिन इसका असर आज भी उस इलाके में पैदा होने वाली पीढ़ी पर देखा जा सकता है|

त्रासदी के 2 दिन के पश्चात ही राज्य सरकार ने राहत का कार्य आरम्भ कर दिया था। जुलाई 1985 में मध्य प्रदेश के वित्त विभाग ने राहत कार्य के लिये लगभग एक करोड़ चालीस लाख डॉलर कि धन राशि लगाने का निर्णय लिया। अक्टूबर 2003 के अन्त तक भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के अनुसार 5,54,895 घायल लोगो को व 15,310 मृत लोगों के वारिसों को मुआवजे का कुछ अंश दिया गया था|

Rohit Jha

A writer who is willing to produce a work of art, To note, To pin down, To build up, To make something, To make a great flower out of life even if it’s a cactus.

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