आखिरी सांसे गिन रहा- ‘कावर झील पक्षी विहार’

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कावर झील एशिया की सबसे बड़ी शुद्ध जल (वेटलैंड एरिया) की झील है। इसके साथ यह बर्ड संचुरी भी है। इस झील को पक्षी विहार का दर्जा 1984 में बिहार सरकार ने दिया था। यह झील 42 वर्ग किलोमीटर (6311 हेक्टेयर) के क्षेत्रफल में फैली है। इस बर्ड संचुरी में 59 तरह के विदेशी पक्षी और 107 तरह के देसी पक्षी ठंडे के मौसम में देखे जा सकते हैं। पुरातत्वीय महत्व का बौद्धकालीन हरसाइन स्तूप भी इसी क्षेत्र में स्थित है।

कावर झील पक्षी विहार'

बेगूसराय के मंझौल स्थित ‘कावर झील’ को प्रकृति ने एक अमूल्य धरोहर के रूप में हमें प्रदान किया था। लेकिन आज यह झील लुप्त हो रही है। बुजुर्ग कहते हैं, ‘बारह कोस बरैला, चौदह कोस कबरैला’, अर्थात एक समय था कि बरैला की झील बारह कोस अर्थात 36 वर्ग किलोमीटर में और कबरैला झील चौदह कोस में अर्थात 42 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हुई थी। विगत कुछ वर्षों से झील में जल संकट गहराता जा रहा है। गर्मियों में तो यह बिल्कुल सूख जाती है। इसका कारण है, पर्याप्त पानी झील में इकट्ठा न होना। पहले बरसाती पानी बहकर नालों के जरिए झील में गिरता था, परंतु अब इन नालों में गाद भर जाने से पानी झील तक नहीं पहुंच पाता है। बाढ़ में आसपास की मिट्टी झील में आने से भी इसकी गहराई कम हो रही है। समय रहते यदि झील को बचाने के लिए प्रयास नहीं किए गए तो आने वाली पीढि़या इस झील का केवल नाम ही सुन पाएंगी।

बेगूसराय के जिला मजिस्ट्रेट एवं कलेक्टर राहुल कुमार ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा कि कावर झील पक्षी विहार की स्थिति अच्छी नहीं है लेकिन यह मामला उच्च न्यायालय में लंबित होने के कारण अभी कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है|

कुमार ने कहा कि यह झील छह हजार हेक्टेयर में फैली है| इसके आसपास आबादी वाला इलाका है| लोगों की मांग है कि पक्षी विहार क्षेत्र के दायरे को कम किया जाए, यहां मछली पकड़ने और आसपास निर्माण कार्य करने की अनुमति दी जाए, लेकिन वन्य प्राणी संरक्षण क्षेत्र होने के कारण ऐसा संभव नहीं है| इन्हीं मुद्दों पर मामला उच्च न्यायालय में चल रहा है|

उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने विकास आयुक्त के नेतृत्व में एक समिति गठित की| समिति ने दो जन सुनवाई करने के बाद अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंप दी है|

सर्दियों में कावर झील पक्षी विहार में साइबेरियाई देशों रूस, मंगोलिया, चीन आदि देशों से पक्षी बड़ी तादाद में पहुंचते हैं| नवंबर से आने वाले ये पक्षी मार्च में वापस लौट जाते हैं| कांवर झील दुनिया का सबसे बड़ा वेटलैंड एरिया माना जाता है| इसे पक्षीविहार का दर्जा 1986 में बिहार सरकार ने दिया था|

जमीन की कीमत तेजी से बढ़ने के कारण भू माफियाओं की भी नजर यहां की जमीन पर है| हालांकि वन्य जीव संरक्षण और स्थानीय लोगों का एक बड़ा तबका इस विरासत को बचाने के लिये सरकार से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग कर रहा है|

ये पहला बार नहीं जब बिहार की धरोहर को इस तरह नज़र अंदाज़ किया जा रहा है| राज्य सरकार के साथ केंद्र सरकार की इस तरह की लापरवाही के वजह से बिहार में न तो टूरिस्ट आते न ही कभी बिहार की छवि बदल सकती है| गौरतलब हो कि कुछ इसी प्रकार से रोहतासगढ़ के किले को भी नज़रंदाज़ कर के बर्बाद कर दिया गया था| क्या कभी बिहार की छवि बदल पायेगी? या फिर इसी तरह धीरे धीरे बिहार के धरोहर को बर्बाद होते राज्य सरकार देखती रहेगी|

Rohit Jha

A writer who is willing to produce a work of art, To note, To pin down, To build up, To make something, To make a great flower out of life even if it’s a cactus.

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