बिहार महागठबंधन में कुछ भी ठीक नहीं, तेजश्वी ने रद्द की सभाएं

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लोकसभा चुनाव के मध्यनजर बिहार महागठबंधन में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है| सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के बीच मामला दिन प्रतिदिन और भी पेंचीदा होता जा रहा है| इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने दिल्ली में अपने आवास पर बैठक बुलाई है| उधर राजद व विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजश्वी यादव ने अपने तीन चुनावी सभाओ को रद्द कर दिया है|

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दरअसल, जहाँ एक तरफ सभी पार्टियाँ लोकसभा चुनाव को लेकर तैयारियां करने के साथ अपने-अपने उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतार रही है| वही, बिहार के सियासी गलियारों का माहौल कुछ और ही है| असल में बिहार महागठबंधन में इतनी छोटी-बड़ी सियासी पार्टियां शामिल हो गयी है कि इस बात का पहले से अंदेशा लगाया जा रहा था की सीट बंटवारे को लेकर महागठबंधन को बहुत चुनौतियों से गुजरना पड़ेगा| आख़िरकर वही हुआ जिस बात का अंदेशा था| बिहार में महागठबंधन की तस्वीर साफ़ हो कर भी पूरी तरह साफ़ नहीं है| कभी दरभंगा तो कभी पटना साहिब, महागठबंधन में ऐसी अनेको सीटो पर मामला इतना उलझा हुआ है कि गाहे-बगाहे महागठबंधन के कोई न कोई नेता एक निश्चित अन्तराल पर यह कहते हुए पाए ही जाते है कि “अगर स्वाभिमान के साथ समझौता हुआ, तो एकला चलो रे वाली नीति अपनाने पर हम मजबूर होंगे”| असल में महागठबंधन के नेताओ के साथ दिक्कत यह है की वो गोलबंदी कर एक साथ चुनाव लड़ना तो चाहते है, लेकिन कोई भी अपना कदम पीछे खीचने को तैयार नहीं है|

बहरहाल राजद नेता तेजश्वी यादव के रद्द हुए तीन सभाओ को लेकर बताया जा रहा है कि उनकी तबियत ख़राब होने के वजह से ऐसा करना पड़ा| जबकि राहुल गाँधी के आवास पर चल रही बैठकों को लेकर तमाम तरह के कयासों का दौर जारी है, मिली जानकारी के अनुसार राहुल गांधी की इस बैठक में बिहार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष मदन मोहन झा, बिहार प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल समेत कई अन्य बड़े नेता शामिल हैं. मालूम हो कि कांग्रेस के कई बड़े नेता इशारो-इशारो में पिछले कई दिनों से इस बात के तरफ इशारा कर रहे है कि राजद उनके साथ सीटो के मामले में तालमेल नहीं बिठा रही है| ऐसे में बिहार महागठबंधन बेहद ही नाजुक दौर से गुजर रहा है| अगर दरभंगा से मौजूदा सांसद कीर्ति आजाद, पटना साहिब से शत्रुघ्न सिन्हा, समेत कई अन्य सीटो पर महागठबंधन अगर तालमेल नहीं बिठा पाती है तो इस बात की पूरी सम्भावना है कि महागठबंधन चुनाव से पहले ही टूट जायेगा|

Shivam

सबसे मुश्किल काम होता है खुद के बारे में कहना. मेरी पहचान एक छात्र के रूप में है. शुरू से ही पाठ्यक्रम के पढाई से अलावा मिलने वाले समय को भरने के लिए कुछ न कुछ पढता रहता था. या यूँ कहे पढता कम उधेरता ज्यादा था. ऐसे ही एक दिन पढ़ते-पढ़ते सोचा चलो लिखता हूँ. बस आ गया, और एक बार जो आ गया तो आ ही गया....

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