बिहार के गया जिले का एक क्वारंटाइन सेंटर पुरे देश के क्वारंटाइन सेंटरों के लिये मिसाल बनकर उभरा है | इस जिले के एक प्रखंड टेकारी के यहां एस एन सिन्हा कॉलेज में एक क्वारंटीन सेंटर बनाया गया है। इस क्वारंटीन सेंटर पर मज़दूरों की हर उस दिक्कत का समाधान किया गया है जिसकी वजह से कई सेंटरों पर हंगामा तक हो जाता है। लेकिन यहां के प्रवासी मज़दूरों को घर जैसा माहौल मिल रहा है।

पूरे हफ्ते शाम में आजीविका से जुड़ी ट्रेनिंग

बीडीओ वेद प्रकाश के मुताबिक इस मॉडल सेंटर में हर शाम के लिए एक चार्ट बना है। जिसके हिसाब से प्रवासी मजदूरों को आजीविका के लिए ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें सेंटर में कृषि चौपाल लगाना, मनरेगा जॉब कार्ड बनवाना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन को दिलवाने जैसे काम शामिल हैं।

रोज सुबह योगाभ्यास से दिन की शुरूआत

इस सेंटर पर सभी प्रवासी मज़दूरों को सुबह 6 बजे से एक घंटे तक योगाभ्यास कराया जाता है। इसके बाद उन्हें गुड़, चने और दूध का नाश्ता दिया जाता है। दोपहर में इनको कुछ ऐसे काम बताए जाते हैं जो प्रवासियों की रुचि के अनुरूप हों। जैसे चित्रकारी करना, कविता लिखना वगैरह। ये काम इन्हें अपने कमरे में ही सोशल डिस्टेंसिग के साथ करना होता है ताकि इनका ध्यान न भटके और ये व्यस्त रहें। दोपहर 12 बजे इन्हें खाना दिया जाता है जिसमें चावल, दाल, सब्जी और सलाद होते हैं। शाम में फिर से इन्हें रिफ्रेशमेंट के लिए चाय और बिस्किट मिलती है। इसके बाद ठीक इसी तरह से रात में 8 से 9 के बीच में इन्हें खाना दिया जाता है जिसमें रोटी, चावल, सब्जी, (साथ में दूध की खीर या कस्टर्ड जो बदलते रहता है) मिलता है।

एंट्री करते ही दिखता है मॉडल सेंटर का ‘मॉडल’

बात अगर सेंटर की करें तो यहां एंट्री करते ही प्रवासी को सेंटर का मैप दिखेगा जिसमें सेंटर में कहां क्या है ये बताया गया है। एंट्री करते ही रजिस्ट्रेशन काउंटर मिलता है जहां प्रवासी की पूरी जानकारी एक फॉर्म में भरी जाती है। यहां प्रवासी मजदूर से ये भी जानकारी ली जाती है कि छोड़े जाने के बाद वो आजीविका में सरकार से किस तरह की मदद चाहते हैं।

सारी व्यवस्था एक जगह

सबसे पहले हेल्थ चेकअप काउंटर पर प्रवासी मज़दूरों की स्क्रीनिंग की जाती है। अगर किसी मजदूर में स्क्रीनिंग के दौरान कोरोना से जुड़े लक्षण दिखते हैं तो उसे नज़दीकी आइसोलेशन सेंटर में शिफ्ट किया जाता है। जिनमें कोई लक्षण नहीं हैं उन्हें एक रूम अलॉट किया जाता है। इन कमरों में एक-एक मीटर की दूरी पर बिस्तर लगाए गए हैं। यहां तक कि इन्हें शौचालय भी अलॉट किया जाता है। यहां 10 लोगों पर एक शौचालय की व्यवस्था की गई है। मतलब सोशल डिस्टेंसिंग के साथ पूरी तरह से घर जैसा माहौल।