आम्रपाली दुबे ने कहा “भोजपुरी इंडस्ट्री अभी साफ-सुथरी है”

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भोजपुरी सिनेमा की मशहूर अदाकारा और सुपरस्टार निरहुआ की पत्नी आम्रपाली दुबे का कहना है कि खुद पर अत्याचार को कोई नहीं सहता है| इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए, लेकिन उसमें सच्चाई का होना जरूरी है. यह बातें आम्रपाली ने मीटू अभियान को लेकर कहीं|

आईएएनएस को दिए अपने इंटरव्यू में आम्रपाली ने कहा, “मीटू अभियान के चलते, कुछ जगहों से आवाजें उठी है|. शायद उनके साथ वैसा बर्ताव हुआ होगा, लेकिन भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्रीज इससे बिलकुल अछूती है| अब तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है|जहां तक मेरी जानकारी है, भोजपुरी इंडस्ट्री में कहीं भी ऐसी आवाज नहीं उठी|भोजपुरी इंडस्ट्री अभी साफ-सुथरी है| इतने दिनों तक मेरे साथ भी कोई ऐसी घटना नहीं हुई है|मेरे जैसी कई अन्य अभिनेत्रियां भी अब तक इससे अनटच हैं|”

उन्होंने कहा कि स्त्री हो या पुरुष, दोनों को संघर्ष करना पड़ता है| जो अपने काम में निपुण हैं, आज उन्हीं को काम मिल रहा है| जो काम नहीं जानते, वे काम न मिलने का शोर मचाते घूम रहे हैं| भोजपुरी इंडस्ट्री अपने काम में महारत वाले शख्स को बिना भेदभाव के काम देती है| आम्रपाली ने कहा, “हां, यह जरूर है कि कुछ एल्बम गानों की वजह से भोजपुरी फिल्में बदनाम हुई हैं| बावजूद इसके ज्यादातर फिल्में ऐसी हैं, जिन्हें परिवार के साथ बैठकर देख सकते हैं| ये फिल्में फैमिली ड्रामा होती हैं, जिन्हें सेंसर बोर्ड से यू/ए सर्टिफिकेट मिलता है|”

भोजपुरी सिनेमा भी बॉलीवुड की तरह सशक्त बनेगा? इस सवाल पर आम्रपाली ने कहा कि आज भोजपुरी फिल्में लोग देश-विदेश में भी देख रहे हैं| बॉलीवुड फिल्म कम से कम 10 करोड़ रुपए के बजट वाली होती हैं, लेकिन भोजपुरी फिल्म महज कुछ लाख के बजट में बन जाती हैं| कम बजट के बावजूद फिल्में हिट होती हैं| इंटरनेट की दुनिया में भी भोजपुरी फिल्में तहलका मचा रही हैं| एक वीडियो को कई करोड़ लोग देख रहे हैं| इससे हमारी मजबूती सिद्ध होती है| कहानी और कान्सेप्ट अच्छा होता है तो लोग फिल्म जरूर देखते हैं|

उन्होंने कहा कि भोजपुरी फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए मल्टीप्लेक्स में भी जगह दी जानी चाहिए, जिससे व्यापार और प्रसार दोनों बढ़ेगा| इस पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि इससे भाषा और बजट दोनों मजबूत होंगे|

आम्रपाली दुबे शायद अपनी फिल्म बनाने के बाद खुद नहीं देखती हैं वर्ना ऐसी बात बोलने से पहले वो कुछ सोचती | हाँ, हो सकता है अभी तक भोजपुरी इंडस्ट्री में मीटू को लेकर कोई विवाद नहीं उठा हो, लेकिन ये कहना कि भोजपुरी सिनेमा साफ़ सुथरी है कहीं न कहीं वो खुद को कटघरे में खड़ी कर रही हैं| साथ उन्होंने कहा कि भोजपुरी सिनेमा को लोग देश- विदेशों में देख रहे हैं, जी इनका कहना भी ठीक है उनके और बाकी कलाकारों को वही लोग देखते हैं जो सिनेमा कम और शरीर पर ज्यादा ध्यान देते हैं|

ख़ैर भारत एक लोकतांत्रिक देश है, यहाँ लोग आज कल कुछ भी बोलते हैं, लेकिन सच यही है कि भोजपुरी सिनेमा दिन प्रतिदिन अपने निचलें अस्तर पर पहुँच चुकी है|

Rohit Jha

A writer who is willing to produce a work of art, To note, To pin down, To build up, To make something, To make a great flower out of life even if it’s a cactus.

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