बिहार के गोपालगंज में तिहरे हत्याकांड के मुद्दे पर राजनीति गर्म होती दिख रही है | एक तरफ जहाँ सत्ताधारी जदयू-भाजपा ने बार बार यह कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच चल रही है तो वहीं दूसरी तरफ विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर सत्ताधारी गठबंधन को निशाना बना रही है | 

बंटा हुआ विपक्ष 

हालाँकि विपक्ष भी इस मामले मे बंटा हुआ है | एक तरफ राजद जहां पप्पू पाण्डेय को सीधे तौर पर इसके लिये जिम्मेदार मान रही है तथा सरकार से लगातार उन्हें गिरफ्तार करने की अपील कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ हिंदुस्तान आवाम मोर्चा प्रमुख जीतन राम मांझी ने कहा है कि राजद बेवजह ही मामले को राजनीतिक रूप देने की कोशिश कर रही है | उनके अनुसार राज्य मे ये इकलौता मुद्दा नहीं है, ऐसे काफी मुद्दे हैं और विपक्ष को उन सब पर ध्यान देने की जरूरत है | वहीं कांग्रेस ने राजद-भाजपा के गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि इसके लिये सरकार सीधे तौर पर जिम्मेदार है |

ग़ौरतलब है कि गोपालगंज मे राजद नेता जेपी चौधरी के घर कुछ गुंडों ने गोलीबारी की तथा इसमे उनके माता-पिता तथा भाई का देहांत हो गया | इस मामले मे मुख्य आरोपी पप्पू यादव के बड़े भाई तथा उनके बेटे को गिरफ्तार कर लिया गया है पर पप्पू पांडे अभी तक गिरफ्तार नहीं किए जा सके हैं | 

मामले की हो सीबीआई जांच : तेजस्वी 

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव मामले की सीबीआई जांच की मांग पर अड़े हैं | गोपालगंज जाने की उनकी योजना को प्रशासन ने विफल कर दिया | उनके साथ राबड़ी देवी भी थीं | प्रशासन ने लॉकडाउन के नियमों का हवाला देते हुए उन्हें जाने की अनुमति देने से इंकार कर दिया | 

काफी देर के ड्रामे के बाद तेजस्वी राजद के विधानसभा अध्यक्ष विजय चौधरी से मिलने गये तथा मुद्दे पर सदन मे विशेष सभा बुलाकर चर्चा करने की मांग की |

प्रशासन ने रोका  

तेजस्वी ने राजद के कुछ विधायकों के साथ गोपालगंज जाने का निर्णय लिया था | एक दिन पहले ही राजद के  सारे विधायक पटना पहुँच चुके थे | काफ़िले को सुबह निकलना था पर इस से पहले ही राबड़ी के आवास के बाहर बड़ी संख्या मे पुलिस की तैनाती कर काफ़िले को निकलने से रोक दिया गया | तेजस्वी ने इसे पुलिस गुंडागर्दी का नाम दिया और कहा कि अगर इतनी पुलिस आरोपी को पकड़ने मे लगाई गयी होती तो आरोपी अब तक पकड़ा जा चुका होता | 

सरकार की नाकामी 

इस पुरे घटनाक्रम मे सरकार की क़ानून व्यवस्था को बरक़रार रखने मे नाकामी साफ़ झलकती है | अगर राज्य मे नेता ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम आदमी कैसे अपने आप को सुरक्षित महसूस करेगा ? क़ानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के बदले नेता तथा मंत्री आरोप प्रत्यारोप मे मशगूल हैं |

साथ ही तेजस्वी यादव के द्वारा लापरवाही साफ़ देखने को मिलती है | देश मे कोरोना के कारण लोग जहां सोशल डिस्टेंसिंग को फॉलो कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ इनके जैसे नेता खुलेआम बड़े बड़े काफिले निकाल रहे हैं | अगर गोपालगंज जाना ही था तो वो अकेले भी जा सकते थे, काफ़िले की जरूरत नहीं थी |