हिन्दू धर्म में तीन प्रकार का तीज पूजन होता है:

 हरियाली तीज – इसमें चन्द्रमा की पूजा होती है|
 कजरी तीज – इसमें नीम के पेड़ की पूजा की जाती है|
 हरितालिका तीज – इसमें भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं|

Happy Haritalika

शिव और पार्वती के अटूट प्रेम को आधार बनाकर अनेक व्रतों और त्योहारों की परंपरा बनी है| मान्यता ये भी है की माता पार्वती और भगवान शिव अपनी पूजा करने वाले सभी सुहागनों को अटल सुहाग का वरदान देते हैं| ऐसे ही अनेक महत्वपूर्ण व्रतों में से एक है हरितालिका तीज (या तीजा व्रत) जो विशेषकर पूर्वांचल और बिहार में मनाया जाता है| ये व्रत हर साल गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले मनाया जाता है|

हरितालिका तीज का संबंध सीधे भगवान शिव से है| ये व्रत हिन्दू विवाहिता महिलाएं अपने पति की लम्बी उम्र और सुखमय जीवन के लिए करती है| हालाँकि ये व्रत सिर्फ विवाहित महिलाओं तक ही सीमित नहीं है, कुंवारी लड़कियां भी अपना मनवांछित वर पाने की चाह में ये व्रत करती है|

Happy Teej

हरितालिका तीज के पीछे की मान्यता

पौराणिक कथाओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए अपनी बाल्यावस्था में गंगा तट पर अधोमुखी होकर घोर तप किया था| तप के दौरान माता पार्वती ने अन्न का त्याग कर दिया था और काफी समय तक पत्ते चबाकर, एवं वायु भोग कर अपना जीवन व्यतीत किया था| पार्वती की इस जिद से उनके माता-पिता अत्यंत दुखी थे|

कहा जाता है कि तप के दौरान ही भगवान विष्णु की ओर से विवाह का प्रस्ताव आया था, जिस से माता और भी व्यथित होकर वन को प्रस्थान कर जाती है और पुनः अपने आराध्य शिव की तपस्या में लीन हो जाती है| भाद्रपद शुक्लपक्ष की तृतीया को माता पार्वती रेत से शिवलिंग का निर्माण करती है और भगवान शिव की भक्ति में लीन होकर रात्री जागरण करती है| इसके उपरांत भगवान शिव माता पार्वती की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन देते हैं और उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करते हैं|

अतः ये सर्वविदित है कि सर्वप्रथम माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए ये व्रत रखा|

हरितालिका तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती के साथ ही प्रथम पूज्य भगवान गणेश का पूजन करना भी फलदायक होता है|

हरितालिका तीज – विधि-विधान

Teej Pujan Vidhi

इस व्रत को करनेवाली महिलायें व्रत के दिन सोलह श्रृंगार कर के, केले के पत्तों से मंडप बनाकर उसमे शिव और पार्वती की प्रतिमा स्थापित कर के पूजन करती है| माता पार्वती को सुहाग की सभी चीजें चढ़ावे के रूप में चढ़ाई जाती है| तीज के दिन रात्री में भजन-कीर्तन करते हुए जागरण कर तीन बार आरती की जाती है, और शिव पार्वती के विवाह की कथा सुनी जाती है| व्रत के अगले दिन व्रत तोड़ने की परंपरा है| माता पार्वती ने जौ खाकर अपना व्रत तोडा था, जिसका चलन आज भी है| आज भी महिलाएं व्रत के अगले दिन जौ का सत्तू और चावल के अनरसे खाकर अपना व्रत पूरा करती है| इसी दिन स्नान के पश्चात श्रद्धा एवं भक्ति पूर्वक किसी सुहागिन स्त्री को श्रृंगार सामग्री दान करने की परंपरा भी है|

हरितालिका तीज 2018 – तिथि और शुभ मुहूर्त

इस साल 12 सितम्बर को हरितालिका तीज है और तीज पूजन का मुहूर्त सिर्फ 2 घंटे 29 मिनट (प्रातःकाल 06:04:17 से 08:33:31) तक है|