shame on you indian media

अन्तर्राष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार भारतीय मीडिया सबसे भ्रष्ट मीडिया है|

भारत मे मीडिया की वर्तमान स्थिति

मीडिया किसी भी देश के लिए एक स्तम्भ की तरह होता है, लोकतंत्र मे तो मीडिया को चौथा स्तम्भ कहा जाता है| हमारे समाज मे मीडिया के महत्व को इसी से समझा ज़ा सकता है कि वह समाज के विभिन्न वर्गों, सत्ता केन्द्रों, व्यक्तियों और संस्थाओं के बीच मध्यस्थ का कार्य करता है| भारत के संचार माध्यम (मीडिया) के अन्तर्गत टेलीविजन, रेडियो, सिनेमा, समाचारपत्र, पत्रिकाएँ, तथा अन्य ऑनलाइन मीडिया प्लेटफॉर्म्स आते हैं। मीडिया का नियंत्रण अधिकांशतः निजी हाथों में है जो बड़ी-बड़ी कम्पनियों द्वारा नियंत्रित है। भारत में 70,000 से अधिक समाचार पत्र हैं, 690 उपग्रह चैनेल हैं (जिनमें से 80 समाचार चैनेल हैं)। आज भारत विश्व का सबसे बड़ा समाचारपत्र का बाजार है जहाँ प्रतिदिन 10 करोड़ प्रतियाँ बिकतीं हैं।

मीडिया से अपेक्षाएं

आज भी मीडिया के सामने बड़े-बड़े नेता, उद्योगपति, और सेलिब्रिटीज सर झुकाते हैं| सामाजिक कार्यो मे भी मीडिया का बहुत महत्वपूर्ण योगदान होता है| मीडिया समय-समय पर नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरुक भी करता है। देश में भ्रष्टचारियों पर कड़ी नज़र रखता है। समय-समय पर स्टिंग ऑपरेशन कर इन सफेदपोशों का काला चेहरा दुनिया के सामने लाता है|

मौलिक रूप से मीडिया का काम निष्पक्ष रूप से ख़बरों को जनता के सामने लाना होना चाहिए| भारत के जैसा लोकतंत्र हो या ब्रिटेन के जैसा राजशाही और लोकतंत्र का मिश्रण, मीडिया की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्यूंकि भोली भाली जनता उनके ऊपर ही हर प्रकार के ख़बरों के लिए विश्वास करती है|

वर्तमान का भारतीय मीडिया

लेकिन सवाल ये है की क्या भारतीय मीडिया अपना काम जिम्मेदारी से कर रहा है? अगर हाँ तो आज वर्ल्ड रिपोर्ट के खुलासे मे भारतीय मीडिया को सबसे भ्रष्ट मीडिया का ख़िताब कैसे मिला? आज ऐसा क्यूँ है की विभिन्न मीडिया हाउसेस को किसी खास राजनीतिक पार्टी का दलाल कहा जाता है|

  1. ऐसा क्यूँ है की नीरा राडिया देश के बड़े बड़े उद्योगपतियों के साथ सांठ गाँठ करके नीति निर्धारक बन गयी?
  2. क्यूँ पुण्य प्रसून बाजपेई परदे के पीछे क्रांतिकारी पत्रकारिता करते हुए पाए जाते हैं?
  3. सुधीर चौधरी और समीर अहलुवालिया खुलेआम एडवरटाइजिंग के नाम पर फिरौती की मांग करते हैं, और ऐसा न करने पर अपने चैनल के द्वारा कोयला घोटाले की ख़बरों को प्रमुखता से अपने चैनल पर प्रसारित करके जिंदल का नाम ख़राब करने की धमकी देते हैं|
  4. अर्नव गोस्वामी को उसी चैनल से निकाल दिया जाता है, जिसकी पहचान ही अर्नव से थी| वो भी इसलिए, क्यूंकि वो चैनल मैनेजमेंट की गुलामी करने से इनकार कर रहे थे| वही अर्नव गोस्वामी कुछ समय बाद एक पार्टी विशेष द्वारा समर्थित निवेश से रिपब्लिक टीवी जैसा एजेंडा आधारित चैनल शुरू करते हैं|
  5. रविश कुमार जो की “रविश की रिपोर्ट” नाम से भारतीय मीडिया मे सबसे प्रचलित पत्रकारिता आधारित कार्यक्रम के लिए जाने जाते हैं, उनको अचानक से देश मे समस्याएं ही दिखने लगती है| लोकतंत्र पर खतरा महसूस होने लगता है, चारो तरफ अराजकता ही दिखती है|

राष्ट्रकवि दिनकर ने कलम की भूमिका पर अपनी कविता कलम और तलवार मे लिखा है:

कलम देश की बड़ी शक्ति है भाव जगाने वाली,

दिल की नहीं दिमागों में भी आग लगाने वाली

पैदा करती कलम विचारों के जलते अंगारे,

और प्रज्वलित प्राण देश क्या कभी मरेगा मारे

एक भेद है और वहां निर्भय होते नर-नारी,

कलम उगलती आग, जहाँ अक्षर बनते चिंगारी

 

इस कविता मे कलम ही आज का मीडिया है| जिस दौर की ये कविता है, उस दौर से लेकर आज तक, जनता की सोच को कलम या फिर मीडिया ने प्रभावित किया है| लेकिन आज मीडिया अपने प्रभाव को खो चूका है और जन जीवन की सोच दुष्प्रभावित करने मे लगा हुआ है| ऐसे मे आश्चर्य नहीं अगर भारतीय मीडिया को विश्व की भ्रष्टतम मीडिया करार दिया गया|