बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रविवार को राजधानी पटना में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जिस समय कार्यकर्ताओं की एक रैली को संबोधित कर रहे थे, ठीक उसी समय उन्हीं की जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) पार्टी के एक विधायक आराम फरमाते हुए कार्यकर्ताओं से पैर दबवा रहे थे। वैसे हमारे बिहार मे तो ये आम बात है, बस कैमरा उन्हें अब जाके पकड़ पाया है |

सेवा करवाने मे व्यस्त थे नेताजी 

यह पूरा मामला पटना के गांधी मैदान का है, जहां सीएम नीतीश के संबोधन के वक्त ही सत्ताधारी दल के एक विधायक का विडियो वायरल हो गया। जहां एक तरफ नीतीश कुमार विपक्षी दलों को निशाना बनाने मे मशगुल थे, तो वहीं दूसरी तरफ ये नेताजी बाकी कार्यकर्ताओं से अपनी सेवा कराने मे व्यस्त थे | मैदान में लेटे हुए नेता की पहचान नवादा के विधायक कौशल यादव के तौर पर हुई है। विधायक एक कार्यकर्ता की गोद में सिर रखकर लेटे हुए थे, जबकि दो कार्यकर्ता उनके पैरों को दबा रहे थे।

वैसे तो नेता का काम होता है जनता की सेवा करना, पर हमारे यहाँ तो नेताजी को भगवान का ही दर्जा दे दिया जाता है | जब और जितनी उनकी दया होगी तब और उतना ही जनता का काम होगा | वैसे नेताजी का पैर दबवाना समझ भी आता है, आखिर गर्मी इतनी ज्यादा है तथा इस गर्मी मे बैठकर पार्टी प्रमुख का भाषण सुनना कोई आसान काम थोड़े ही है | और वो कोई जनता थोड़े ही हैं जो मुश्किल काम करेंगे, वो तो नेताजी हैं, आराम करना तो उनका हक़ है, भले ही जनता कितनी भी परेशान क्यूँ न हो |

बता दें कि बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने सभी अटकलों पर विराम देते हुए रविवार को अपने जन्‍मदिन पर ऐलान किया कि उनकी पार्टी जेडीयू, एनडीए के साथ मिलकर आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेगी। उन्‍होंने दावा किया कि एनडीए विधानसभा चुनाव में 200 से ज्‍यादा सीटें जीतेगी। नीतीश ने कहा कि आरजेडी और कांग्रेस ने अल्‍पसंख्‍यकों से वोट लिए लेकिन काम हमने उनके लिए किया।

जेडीयू सुप्रीमो ने रैली में की बड़ी बड़ी बातें

नीतीश ने कहा कि जहां तक एनपीआर की बात तो राज्‍य में यह वर्ष 2010 के फार्मेट के आधार पर होगा और इस संबंध में हमने बिहार विधानसभा में एक प्रस्‍ताव भी पारित किया है। सीएम नीतीश कुमार ने अपनी उपलब्धियां गिनाते हुए कहा, ‘एनडीए के शासन में कानून व्यवस्था बेहतर हुई है। हमने भागलपुर दंगे के दोषियों को न्याय के कटघरे में लाकर पीड़ितों के लिए न्याय सुनिश्चित किया।’ इसके अलावा उन्होंने पलायन, जातिगत जनगणना और बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की अपनी पुरानी मांग दोहराई।

एक तो ये विशेष राज्य के दर्जे की बात नहीं समझ आती | पिछले 15 सालों से राज्य मे इनकी सरकार है, 6 सालों से केंद्र मे भी इनकी सरकार है फिर इन्हें विशेष राज्य का दर्जा लेने-देने से रोक कौन रहा है ? क्यूँ हर चुनाव मे इसे मुद्दा बनाकर सुशासन बाबू वोट मांगने पहुँच जाते हैं ? इस बार इस मुद्दे को सुनकर वो ‘राँझना’ फिल्म का डायलॉग याद आ गया, “विशेष राज्य का दर्जा न हुआ, यूपीएससी का एग्जाम हो गया है, 10 साल से क्लियरे नहीं हो रहा है”