नेहरू के खिलाफ लोहिया का मोर्चा (1962)

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Nehru

1962 में हुए तीसरे आम चुनाव में सबसे रोचक मुकाबला तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के लोकसभा क्षेत्र फूलपुर (उत्तर प्रदेश) में हुआ था, जहां उनके विरोध में राममनोहर लोहिया चुनाव मैदान में उतरे थे| उस चुनाव में लोहिया की करारी हार हुई थी|

नेहरू को कुल 1,18,931 वोट मिले जबकि लोहिया को मात्र 54,360 वोट ही हासिल हुए थे| नेहरू ने चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करते वक्त एलान किया था कि पूरे चुनाव के दौरान वे अब अपने क्षेत्र में प्रचार के लिए नहीं आएंगे, लेकिन कुछ ही दिनों बाद उन्हें आना पड़ा|

RamManohar Lohia

इस चुनाव से ठीक पहले लोहिया ने कहा था, “मैं मानता हूँ कि दो बड़े नेताओं को एक दूसरे के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ना चाहिए, लेकिन मैं नेहरू के खिलाफ चुनाव लड़ रहा हूँ तो इसलिए क्योंकि उन्होंने देश की जनता को ‘गोवा विजय’ की घूस दी है| यह राजनीतिक कदाचार है| अगर नेहरू चाहते तो गोवा पहले ही आजाद हो गया होता|”

लोहिया ने कहा, “दूसरी बात यह है कि प्रधानमंत्री नेहरू पर रोजाना 25 हजार रुपये खर्च होते हैं, जबकि देश की तीन चौथाई आबादी को प्रतिदिन दो आने भी नहीं मिलते हैं| नेहरू की यह फिजूलखर्ची भी एक तरह का भ्रष्टाचार है|”

उन्होंने कहा था, “मैं जानता हूँ कि मैं चट्टान से टकराने जा रहा हूँ| मैं चट्टान को तोड़ तो नहीं पाऊंगा लेकिन उसे दरका जरूर दूंगा| इस चुनाव में नेहरू जी की जीत प्राय: निश्चित है लेकिन मैं इसे प्राय: अनिश्चित में बदलना चाहता हूँ ताकि देश बचे और नेहरू को भी सुधरने का मौका मिले|”

लोहिया यह चुनाव हारने के एक साल बाद ही 1963 में उत्तर प्रदेश की फर्रुखाबाद सीट से उपचुनाव जीतकर लोकसभा में पहुंच गए| लोकसभा में पहुंचते ही उन्होंने नेहरू की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया| प्रस्ताव पर बहस के दौरान उन्होंने जो भाषण दिया वह आज भी एक ऐतिहासिक दस्तावेज है|

Rohit Jha

A writer who is willing to produce a work of art, To note, To pin down, To build up, To make something, To make a great flower out of life even if it’s a cactus.

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