शकील अहमद का दावा, कांग्रेस नेताओ का मिल रहा साथ

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मधुबनी संसदीय सीट से लोकसभा के निर्दलीय उम्मीदवार शकील अहमद ने एक न्यूज़ एजेंसी से बात-चित के दौरान कहा कि मुझे जनता पर भरोसा हैं। इस क्षेत्र के कांग्रेस नेता. विधायक और छात्र संगठनों को सहयोग मिल रहा हैं। मैं कांग्रेसी हूं कांग्रेसी था और रहूंगा। अहमद ने कहा कि जो चुनाव लड़ रहा हूं यह भी कांग्रेस के लिए लड़ रहा हूं। जो गठबंधन हुआ था उसमें भाजपा को रोकना था। भाजपा भाई-भाई को लड़ाती हैं अगर महागठबंधन का उम्मीदवार मजबूत होते और फेमस नाम होता तो उनको भाजपा से लड़ने के लिए छोड़ देते। लेकिन भाजपा के जीत को रोकने के लिए मुझे आना पड़ा हैं।

34 साल से कर रहा हूं सेवा

निर्दलीय उम्मीदवार शकील अहमद ने कहा कि मेरे दादा विधायक थे। मेरे पिता 5 बार विधायक और डिप्टी स्पीकर रहे थे। मैं खुद 34 सालों से विधायक, एमएलसी, बिहार सरकार में मंत्री, केंद्र सरकार में मंत्री, प्रवक्ता रह चुका हूं। फिर भी मैं इसलिए निर्दलीय चुनाव लड़ रहा हूं कि कांग्रेस की प्रतिष्ठा बनी रहे और इस चुनाव में भाजपा की हार हो सके।

23 के बाद चल जायेगा पता

महागठबंधन द्वारा परेशान किये जाने के सवाल पर अहमद ने कहा कि यह तो 23 मई को पता चलेगा की किसकी राह आसान और कठिन हुई। सबसे अधिक मेरे नामांकन में भीड़ देखकर सबसे अधिक कोई दुखी हैं तो वह भाजपा के उम्मीदवार हैं। टिकट नहीं मिलने के सवाल पर कहा कि टिकट नहीं मिलने से थोड़ा दुख हैं। जब गठबंधन टूटने की सवाल हुआ तो मैंने कहा कि मेरे सीट के लिए आप महागठबंधन को मत तोड़िए। लेकिन राहुल गांधी ने मेरे लिए टिकट का प्रयास किया था। तबतक देर हो चुकी थी। उनको कुछ लोगों ने दिग्भ्रमित किया था।

Shivam

सबसे मुश्किल काम होता है खुद के बारे में कहना. मेरी पहचान एक छात्र के रूप में है. शुरू से ही पाठ्यक्रम के पढाई से अलावा मिलने वाले समय को भरने के लिए कुछ न कुछ पढता रहता था. या यूँ कहे पढता कम उधेरता ज्यादा था. ऐसे ही एक दिन पढ़ते-पढ़ते सोचा चलो लिखता हूँ. बस आ गया, और एक बार जो आ गया तो आ ही गया....

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