क्या आपने कभी ऐसे शख्स के बारे मे सुना है, जो अकेले 10 लोगों के बराबर खाना खाता हो ? अगर थोडा विस्तार से कहा जाए तो ये शख्स अकेले ही 80 से ज्यादा लिट्टी कहा लेता है | इसके अलावा 10 से 12 प्लेट चावल के साथ 35 से 40 रोटियां भी इसके खुराक का हिस्सा है | अब आप सोच रहे होंगे कि जरुर ही ये शख्स कोई पहलवान होगा, जी नहीं, यह एक मामूली सा इंसान है जो बिहार के बक्सर जिले के एक क्वारंटाइन सेंटर मे रुका हुआ है |  

अपनी खुराक को लेकर फेमस हुआ ये इंसान  

अपनी खुराक को लेकर फेमस हुए इस इंसान का नाम अनूप ओझा है। इसकी कद-काठी को देखकर बिल्कुल भी नहीं लगता ये इतना ज्यादा खाना खाता होगा। क्वारंटीन केंद्र के संचालकों के मुताबिक, इसका वजन भी महज 70 किलो के आस-पास ही है, लेकिन जितनी खुराक वो लेता है उसे सुनकर पहलवान भी शरमा जाएं। अनूप ओझा की खुराक ने क्वारंटीन केंद्र संचालकों की मुश्किलों को बढ़ा दिया है।

इस शख्स के खाने से क्वारंटीन संचालक भी परेशान

सेंटर के संचालकों ने बताया कि उनके केंद्र पर फिलहाल 87 लोगों क्वारंटीन किया गया है। ऐसे में 21 वर्षीय अनूप ओझा की खुराक को देखते हुए सेंटर में करीब 100 से ज्यादा लोगों का खाना बनाया जाता है। जिससे सेंटर मौजूद बाकी लोगों को खाने की कमी नहीं हो। वहीं जिले के अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी गई, जिसके बाद अधिकारी खुद क्वारंटीन सेंटर में इसकी जानकारी लेने के लिए पहुंचे। इस दौरान अधिकारियों ने कहा कि सेंटर में सभी को खाने की पर्याप्त व्यवस्था की जाए। खास तौर से अनूप ओझा के खाने में कोई कमी नहीं आए।

एक बार में 80 से ज्यादा लिट्टी खा गए अनूप

वहीं मझवारी क्वारंटीन सेंटर की व्यवस्था देखने वाले मुखिया प्रमोद कुमार साह ने बताया कि अनूप ओझा के लिए खास व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा ‘सबकुछ तो ठीके है पर उसके लिये एतना रोटी कौन बनाएगा ? 10 प्लेट भात देवे मे कोय समस्या तो नहिएँ है | तीन-चार दिन पहले क्वारंटीन सेंटर पर सबके लिए लिट्टी-चोखा बनाबल गया था, तौ अनूप अकेले 80 से ज्यादा लिट्टी खा गया था।’

कौन हैं अनूप ओझा, जानिए

अनूप ओझा, बक्सर के सिमरी प्रखंड स्थित खरहाटांड़ गांव के रहने वाले हैं। कुछ महीने पहले ही वह राजस्थान के भिवाड़ी में नौकरी की तलाश में गए थे। अनूप को वहां काम मिलता इसी बीच कोरोना संकट की वजह से देशभर में लॉकडाउन घोषित कर दिया गया। ऐसे में कई दिनों तक अनूप ओझा लॉकडाउन में फंसे रहे। करीब हफ्तेभर पहले ही वो एक श्रमिक स्पेशल ट्रेन से अपने गृह जिले बक्सर पहुंचे। इस दौरान प्रशासन ने उनकी स्वास्थ्य जांच की, फिर उन्हें 14 दिनों के लिए क्वारंटीन सेंटर में भेज दिया गया।