कभी कभी लगता है अपना बिहार भी एगो अजीबे राज्य है | जिस राज्य मे लोगों के पास खाने से लेकर पढने व रोज़गार के साधनों तक की कमी है वहां की सरकार को अचानक ये ख्याल आता है कि राज्य की जनसंख्या बढने से रोकने के ऊपाय करने ज्यादा जरूरी हैं | लोगों के स्वास्थ्य सुविधाओं, रोजगार के मौके व भूख से भी ज्यादा | तभीए तो सरकार ने क्वारंटाइन सेंटर मे अपना दिन काट चुके प्रवासी मज़दूरों को गर्भ निरोधक बाँटने का फैसला लिया है |   

वैसे तो ई फैसला अपने आप मे कौनो गलत कदम नै है | परिवार नियोजन व जनसंख्या नियंत्रण की रणनीति बिहार के लिये बहुते कारगर हो सकती है | पर ऐसन समय मे जब सरकार को राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं तथा जनता की बाकी ज़रूरतों को पूरा करे पर अपना ध्यान केन्द्रित करना चाहिए तब सरकार अगर ई करे तो जनता को भी जरा सा सोचना चाहिए | एक तरफ बिहार मे कोरोना के केस बढ़ले जा रहा है, हॉस्पिटल मे मरीज के लिये जगह नहीं है, दूसरी तरफ राजनीतिक पार्टी सब रैली पर रैली कैले जा रहा है | इसब सोच के यही लगता है कि किस्मते फुटल है बिहार की जनता का | 

सायद नीतीश जी चुनाव प्रचार मे कुछ जादे ही बिजी हो गये हैं | जनता के जरूरतों का ख्याल हीं नहीं आ रहा है | अमीत शाह जी के रैली मे 72000 ठो एलइडी लगवा दिए लेकिन बिहार मे अभी भी कोरोना टेस्टिंग को स्पीड नै दे पा रहे हैं | फिर लगता है कि उ जरूरी काम थोड़े है, बिहार की जनता तो वैसे भी राम भरोसे रहिये रही है, आगे भी रहिए लेगी, चुनाव ज्यादा जरूरी है | आखिरकार ये लोकतंत्र का पर्व जो है | इसको मनाना जादा जरूरी है | लोगों के जान से भी जादा |

पता चला है कि बिहार मे कोरोना केस 5000 पार कर गया है, 30 लोग से उपर मर भी चुका है ई कोरोना के कारण, पर क्या ही फरक पड़ता है | जब तक नेताजी का भाषण सुनने की व्यवस्था हो जाती है तब तक सब ठीके है | वैसे भी नीतीश जी की कोई गलती थोड़े है कि राज्य मे इतना समस्या है, इसब तो आरजेडी के जंगलराज का नतीजा है | उ तो भला हो नीतीश जी और भाजपा का जो बिहार मे सुशासन लेके आये नहीं तो जाने क्या होता |  

वैसे उ क्वारंटाइन सेंटर बला अधिकारी बोला है कि गर्भ निरोधक तब तक बांटा जाता रहेगा जब तक क्वारंटाइन केंद्र बंद नहीं हो जाता |15 जून को बंद हो रहा है बिहार मे सारा क्वारंटाइन केंद्र | तब तक कर लीजिये जनसंख्या नियंत्रण |