मानसून आने के साथ ही बिहार में बाढ़ की आहट भी आने लगी है। गंगा नदी का जल स्तर बढ़ने लगा है। जल स्तर अभी 45 मीटर पर है। यह खतरे के निशान के नीचे है। बारिश के साथ ही जलस्तर बढ़ने की संभावना है। वहीं, नेपाल से आने वाली गंडक और कोशी जैसी नदियों का जलस्तर भी बढ़ने लगा है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को जल संसाधन विभाग व अन्य विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की। मुख्यमंत्री ने बाढ़ की रोकथाम के लिए किए गए कार्यों की समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि कोशी, गंडक, कमला एवं अन्य नदी बेसिन एवं सीमावर्ती क्षेत्रों तथा पिछली बार जहां कटाव हुआ था उन स्थलों पर  सुरक्षा हेतु बाढ़ सुरक्षात्मक कार्यों का कार्यान्वयन पूरी तत्परता से करें। बाढ़ सुरक्षा से संबंधित सभी लंबित योजनाओं को पूर्ण करने के लिए नेपाल के भी संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य को शीघ्र पूरा करें।

तटबंधों के किनारे वृक्षारोपण करने का ऐलान भी किया गया है । इससे तटबंधों को मजूबती मिलेगी साथ ही रिसाव भी नियंत्रित होगा। सभी तटबंधों के महत्त्वपूर्ण स्थानों पर बाढ़ से बचाव के सामग्रियों का भंडारण पर्याप्त मात्रा मे करने की रणनीति है ताकि बाढ़ की स्थिति में बचाव कार्य सुचारू रूप से किया जा सके।

कमला बलान तटबंध की मजबूती के लिए तटबंधों में स्टील सीट पायलिंग की जा रही है। इस तरह का प्रयोग बिहार में पहली बार हो रहा है। इससे तटबंध को मजबूती मिलेगी। संभावित बाढ़ को देखते हुए ललबेकिया दायां मार्जिनल बांध एवं कमला वियर के बायें एवं दायें गाईड/मार्जिनल बांध पर बाढ़ रोकने के सामग्रियों का भंडारण पर्याप्त मात्रा में किया जा रहा है |