Home Editorial किफायती इन्टरनेट सर्विसेज के मामले में भारत टॉप पर

किफायती इन्टरनेट सर्विसेज के मामले में भारत टॉप पर

अमूमन जब आप अपने आसपास मौजूद हर आदमी के हाथ में एक स्मार्ट फोन देखते है| जिसपर वह अनेको ऐप चलाते हुए अपने डिजिटल दुनिया में मगन होता है| तब आप क्या सोचते है, यक़ीनन आप कुछ भी नहीं सोचते होंगे! क्योंकि यह आपके लिए इतना आम हो गया है कि, इसमें कुछ सोचने वाली बात रह ही नहीं गई है| लेकिन वो वजह जो आपके सामने इन चीजो को इतना आम बना गया है, वो है किफायती मोबाइल इन्टरनेट सर्विसेज| दुनिया में सबसे सस्ता मोबाइल इंटरनेट ही है जो इस क्रांति को ऑक्सीजन दे रहा है। हमारे लिए यह सब देखना इसलिए भी आम हो गया है क्योंकि पूरी दुनिया में सबसे किफायती मोबाइल इन्टरनेट सर्विसेज भारत में ही है| ये बातें वैश्विक कीमतों की तुलना करने वाली ब्रिटेन की जानी-मानी वेबसाइट केबल.सीओ.यूके के हालिया अध्ययन से निकलकर सामने आई है|

देश में फैलता इंटरनेट का जाल

मार्केट रिसर्च एजेंसी कांतार आइएमआरबी के मुताबिक इस साल तक देश में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की कुल संख्या 62.70 करोड़ के आंकड़े को छू सकती है। ग्रामीण इलाकों में तेजी से इंटरनेट के इस्तेमाल ने इसके विकास दर को दोहरे अंक में पहुंचा दिया है। एक सच यह भी है कि देश में कुल इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों में से 97 फीसद ऐसे लोग है, जो इसे इस्तेमाल करने के लिए मोबाइल को माध्यम बनाते हैं। जहाँ शहरों में इसकी वृद्धि दर सात फीसदी है तो ग्रामीण इलाकों में यही रफ्तार 35 फीसदी तक जा पहुंची है।

इस्तेमाल करने वालो का बढ़ता घनत्व

सुलभ इंटरनेट सेवा, किफायती प्लान और लोगों के बीच डिजिटल होने के प्रति बढ़ती जागरूकता ने शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच की खाई पाटने की शुरुआत कर दी है। वो साल 2015 ही था जब देश के ग्रामीण इलाकों में सौ में से सिर्फ नौ लोग ही इंटरनेट का इस्तेमाल करते थे, जबकि 2018 में यह आंकड़ा 25 तक पहुंच गया है। किफायती इन्टरनेट सेवाओ ने न केवल लोगों के खरीदने, भुगतान करने, मनोरंजन करने के परंपरागत तरीकों को बदलकर रख दिया है। बल्कि ग्रामीण इलाको में रहने वाले लोगो के बीच इन्टरनेट को लेकर बनी धारणा भी बदल गयी है| वो अब इन्टरनेट के महत्ता को समझने लगे है| और उनका झुकांव आंकड़ो में साफ़ देखा जा सकता है|

यूरोप में असमानता चरम पर

इन्टरनेट डाटा की कीमतों में यूरोपीय महाद्वीप के देशों में असामनता चरम पर है| जहाँ इटली में एक जीबी डाटा की कीमत औसतन 1.73 डॉलर है, वहीं जर्मनी में इसकी कीमत सात डॉलर तक जा पहुंचती है।

अध्ययन ऐसे हुआ

वैश्विक कीमतों की तुलना करने वाली ब्रिटेन की जानी-मानी वेबसाइट केबल.सीओ.यूके ने 230 देशों के 6313 डाटा प्लान का अध्ययन किया। जिसमे कि भारत में मोबाइल इंटरनेट सबसे सस्ता है। वहीं, दूसरे स्थान पर किर्गिस्तान है। भारत में एक गीगाबाइट डाटा के लिए उपभोक्ताओं को 0.26 डॉलर (करीब 18 रुपये) चुकाने पड़ते हैं। वहीं, सैलानियों के पसंदीदा देश स्विट्जरलैंड में प्रति जीबी डाटा कीमत 20.22 डॉलर है। जबकि, जिंबाब्वे की कीमतें भारत से 289 गुना ज्यादा है। यहां एक जीबी डाटा की कीमत औसतन 75.20 डॉलर के आंकड़े पर पहुँच जाती है|