“बेटी बचाओ बेटी पढाओ”- ” बाप एवं परिवार को भी बचाओ“

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मेरा भारत महान

भारत उन देशों मे से एक है जहां औरत को देवी समान पूजा जाता है|

“बेटी बचाओ बेटी पढाओ” का कालजयी नारा आपको याद होगा| जब सरकार ने ये नारा दिया तो सुनकर बहुत अच्छा लगा| ऐसा लगा जैसे बदलाव की बयार अब शुरू होने ही वाली है| जहाँ महिलाओं और लड़कियों को समुचित संरक्षण और सफल होने के नित नए आयाम मिलेंगे|

लगा कि चलो कुछ तो अच्छा हो रहा है लेकिन तब शायद हम समझ नहीं पाए कि हमारी सरकार ने ये नारा नहीं आम लोगो से सवाल किया था कि “बेटी बचाओ“| हम समझ ही नहीं पाये कि हमारी सरकार हमसे कहना चाह रही है कि “रेप से अपने बेटियों को बचाओ” इतना ही नहीं उसके बाप एवं परिवार को भी बचाओ“| हम तो कुछ नहीं करने वाले है हमें तो उपवास करना है क्युकी विपक्ष संसद नहीं चलने दे रहा और हम भाषण दे रहे हैं कि कच्चा तेल की कीमत अरब देश न बढ़ाये | हम यहाँ पर राजनीति की बात नहीं करना चाहते है लेकिन क्या करे?

एक बार सिर्फ भारतीय या एक आम इंसान बनकर सोचिये, न की कोई हिंदू-मुसलमान, ऊंची जाति, नीची जाति, नॉर्थ इंडियन, साउथ इंडियन, बिहारी –बंगाली, गुजराती-मराठी, हरयाणवी–पंजाबी, न दिल्ली वाले, न मुंबई वाले, ना काले-गोरे, हरे-पीले, लाल-गुलाबी, भगवा-कत्थई; बस जरा भारतीय बनकर सोचें और भारत को बचा लें|

क्योंकि वो जो निर्भया के लिए सड़क पर निकले थे, वो लोग मुझे कहीं दिख नहीं रहे हैं| जिन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कें भर दी थी, वो भी मुझे कहीं दिख नहीं रहे हैं| जो आरक्षण के लिए सड़क पर निकले थे, जो एक फिल्म के विरोध के लिए भारत बंद कर देते हैं, जो रामनवमी का जुलुस निकालते हैं, जो पैगम्बर साहब के जन्म दिवस पर जुलुस निकालते हैं| सब के सब कहीं नहीं हैं, शायद ये मुद्दे मलाई वाले नहीं या फिर इनमे उनका कोई निजी हित नहीं|

 

उन्नाव (योगी का उत्तर प्रदेश)

किसी की 16 साल की बेटी का अपहरण कर बलात्कार किया जाता है, और उसके बाप की गुंडों द्वारा पिटाई की जाती है| इतना सब होने के बाद जब एक बेबस बाप रिपोर्ट लिखवाने पुलिस स्टेशन जाता है तो गुनहगार पर कारर्वाई करने के बजाय, उलटे पीड़िता के बाप पर ही कारर्वाई होती है| हाजत में बंद कर उसकी इतनी पिटाई की जाती है कि, बेचारे की जेल मे ही मौत हो जाती है| उसके परिवार वालो को अपने ही घर से भागने पे मजबूर कर दिया जाता है| और जो अपराधी है वो खुले आम घूम रहे है|

पुलिस और प्रशासन की तो बात ना ही करें तो बेहतर है, क्या पता बात करने के जुर्म मे ही सजा मुक़र्रर हो जाए|

 

कठुआ (मोदी और महबूबा का कश्मीर)

अब बात करते है एक 8 साल की बच्ची की, जिसको मालूम भी नहीं बलात्कार क्या होता है, कौन करता है कैसे करता है| जब घटना हुई तब किसी को एहसास भी नहीं, शायद तब तवा गर्म नहीं था की इंसानियत के पहरेदार अपनी रोटियां सेंक पायें| शायद मीडिया के पास भी ज्यादा बेहतर मसाला था, पद्मावती की अस्मिता खतरे मे थी, मृत काले हिरण को इन्साफ दिलाना था|

इन सब मे किसी को उस बच्ची की याद नहीं आई, जो की पद्मावती की तरह कोई ऐतिहासिक (या शायद काल्पनिक) लड़की नहीं थी| उसका एक प्यारा सा नाम था (आसिफ़ा), उसकी एक प्यारी से दुनिया थी, एक परिवार था, उन नन्ही आँखों मे कितने सपने थे| लेकिन इन सबको हैवानियत की नज़र लगी| कई कई दिनों तक बलात्कार जैसी शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के बाद उसे ऐसे ही किसी सड़क पर मरने के लिए फेक दिया गया| करणी सेना, भीम सेना, हिन्दू परिषद, कांग्रेस, बीजेपी, किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा|

हमारे ही बीच रह रहे कुछ लोगो ने उस 8 साल की बच्ची को उठा लिया और कुकृत्य के लिए किसी जगह ले गये| इस बात से फर्क नहीं पड़ता की वो मंदिर है या कुछ और, क्यूंकि जिनके अन्दर इंसानियत नहीं उसके अन्दर भगवान का क्या डर|

beti bachao nara hai ya chetawani

 

सासाराम (नितीश कुमार जी का सुशासन वाला बिहार)

6 साल की एक लड़की के साथ रेप हो जाता है और विरोध में लोग राष्ट्रीय राज मार्ग को बाधित कर देते है जब हमारी सरकार अपने राज्य को शराब मुक्त करवा सकती है “बेटी बचाओ बेटी पढाओ “ साथ ही साथ दहेज़ मुक्त विवाह के भी नारे लगवाती है |

लड़कियों के साथ दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे  दुष्कर्म के घटनाओ को रोकने के लिए सरकार नाकाम क्यों है? क्यों किसी को ऐसा घिनौना कृत्य करने से पहले समाज या प्रशासन का कोई भय नहीं रहता |

सोशल मीडिया पर क्रिया और प्रतिक्रिया का दौर जारी है-

ट्विटर पर तमाशा

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