Home Editorial आज के समय मे नेहरु की प्रासंगिकता

आज के समय मे नेहरु की प्रासंगिकता

ऐसे समय मे जब नेहरु को देश के इतिहास का सबसे बड़ा विलेन बताने की जद्दोजहद की जा रही है, नेहरु से जुड़े कुछ तथ्य

आज देश के प्रथम प्रधानमंत्री स्वर्गीय पंडित जवाहर लाल नेहरु के 56वें पुण्यतिथि के मौके पर ये सवाल तो बनता ही है कि आज के समय मे नेहरु तथा उनके आदर्श कितने प्रासंगिक हैं | वह भी तब जबकि देश के सत्ताधारी पक्ष ने उन्हें तथा उनके विचारों को बदनाम करने मे कोई कसर नही छोड़ी है | आज हम उनके कुछ आदर्शों तथा वर्तमान परिस्थितियों मे उनकी प्रासंगिकता की चर्चा करेंगे |

हिन्दू कोड बिल 

उनके सबसे विवादास्पद फ़ैसलों मे से एक था हिन्दू कोड बिल | इसके तहत डॉ भीमराव अंबेडकर ने समस्त हिन्दू समाज के लिये सिविल क़ानून को एक करने का प्रस्ताव रखा था | इस प्रस्ताव का हिंदूवादी संगठनों द्वारा काफी विरोध हुआ तथा अंत मे अंबेडकर ने अपना त्यागपत्र भी दे दिया | पर पंडित नेहरु ने इसे कुछ बदलाव के साथ सदन मे पास कराया | उनका मानना था कि अलग अलग बंटे हिन्दू समाज को एक करना जरुरी है तथा इसके बाद ही अलग अलग धर्मों को भी एकजुट किया जा सकता है |इस बिल की वजह से ही आज हिन्दू समाज के अलग अलग जातियां होने के बावजूद भी सबके सिविल क़ानून एक ही हैं |

आधुनिक सोच

पंडित नेहरु देश के सबसे आधुनिक सोच रखने वाले नेताओं मे से एक थे | उन्होंने भारत के रूप मे हमेशा एक ऐसे देश की कल्पना की जहां की हर धर्म, जाती तथा समुदाय के लोग सौहार्द के साथ रह सकेंगे | युवाओं के अंदर वो वैज्ञानिक सोच का विकास करना चाहते थे | एक ऐसे देश की कामना जहां के लोग अपनी सोच को लेकर आजाद तथा तार्किक होंगे | इसी सोच के साथ जे एन यू की स्थापना की गयी | इसका उद्देश्य युवाओं को अपनी सोच को लेकर आज़ाद रखना तथा देश मे हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाना था |

उम्मीद ये थी की आने वाले समय मे सरकारें ऐसे कई विश्वविद्यालयों को बढ़ावा देंगी | पर आज के समय मे सरकार वहां के छात्रों की आवाज़ को दबाने मे तथा इसे बदनाम करने मे लगी है | 

पटेल के साथ मतभेद 

वर्तमान सत्ताधारी पार्टी ने पटेल तथा नेहरु को एक दूसरे का विरोधी बताने मे कोइ कसर नही छोड़ी है | जबकि विभिन्न स्त्रोत ये बताते हैं कि दोनों के बीच काफी सौहार्द भरा रिश्ता था | देश के लिये जाने वाले फैसलों मे कई बार दोनों के विचारों मे अंतर देखने को मिलता था पर दोनों के मन मे एक दूसरे के प्रति कटुता के भाव कभी नही आये |

इन सारी बातों के अलावा नेहरु के दिमाग का लोहा पूरी दुनिया मानती थी | गुटनिरपेक्ष आन्दोलन पूरी तरह नेहरु के दिमाग की उपज थी | इसके बावजूद अगर प्रधानमंत्री मोदी तथा उनकी पार्टी नेहरु का मज़ाक बनाते हैं तो इसकी एक ही वजह समझ आती है, प्रधानमंत्री खुद को नेहरु से बेहतर दिखाना चाहते हैं | अब इसके लिये अगर नेहरु का मजाक बनाना पड़े तो यही सही |