पटना को जल्द ही एक और लैंडमार्क मिलने वाला है। जगमगाते सभ्यता द्वार का दीदार शीघ्र ही पर्यटक कर सकेंगे।पटना का लैंडमार्क ‘सभ्यता द्वार’ बिहार को गौरव दिलाने वाले महापुरुषों की याद दिलाएगा।

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गाँधी मैदान से उत्तर गंगा के तट पर सभ्यता द्वार का निर्माण लगभग पूरा हो गया है। पटना शहर के औपचारिक प्रवेश द्वार के रूप में बनकर तैयार है और जल्द ही इसका उद्घाटन होने की संभावना है। लाइटिंग का काम शुरू हो चुका है। उम्मीद है, मई से लोग चमचमाते सभ्यता द्वार का दीदार कर सकेंगे। तकनीकी टीम के एक अधिकारी ने कहा – “हमने गेटवे के चारों ओर मार्ग को प्रकाश देने के लिए नदी के किनारे SAACC की सीमा दीवार पर 150W के 24 लैंप पोस्टों की स्थापना की है। 70W के छह पोस्ट-टॉप लालटेन गार्डन रोशनी संरचना को उजागर करेंगे। अठारह सफेद सोडियम वाष्प लैंप और चार सुनहरे सोडियम वाष्प लैंप संरचना की सुंदरता को उजागर करेंगे और गतिशील एलईडी रोशनी इमारत के लिए अतिरिक्त चमक जोड़ देगा|

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सभ्यता द्वार को मौर्य वास्तुकला के साथ बनाया गया था ताकि वह पाटलिपुत्र की प्राचीन राजधानी की महिमा पैदा कर सके। नई दिल्ली के इंडिया गेट और मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया की तर्ज पर पटना में बनने वाला सभ्यता द्वार अब बस तैयार हो चुका है। बापू सभागार और ज्ञान भवन के बीच गगा के तट पर सभ्यता द्वार का स्ट्रक्चर खड़ा हो गया है। पत्थर लगाने का काम पूरा हो चुका है, अब लाइटिंग का काम शुरू होने वाला है। सभ्यता द्वार की लाइटिंग करने वाली एजेंसी ने निरीक्षण कर लिया है। 32 मीटर ऊंचे सभ्यता द्वार के निर्माण पर पाच करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। यह 12 मीटर लबा और आठ मीटर चौड़ा है। कोशिश थी कि इसे बिहार दिवस तक ही पूरी तरह तैयार कर दिया जाए मगर फिलहाल इसमें एक से डेढ़ महीने का समय और लगेगा। इसके बाद ही सभ्यता द्वार का उद्घाटन होगा।

सभ्यता द्वार के शीर्ष पर चार शेर वाला अशोक स्तभ दिखेगा जो लाइटिंग से जगमग करेगा। भवन निर्माण विभाग सभ्यता द्वार को आकर्षक बनाने में जुटा हुआ है। सभ्यता द्वार पर राजस्थान से मगाए गए रेड एंड वाइट सैंड स्टोन लगाए गए हैं।

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पिछले 10 सालों में राजधानी पटना को कई नए पर्यटन केंद्र मिले है। सभ्यता द्वार भी इसकी एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा। गांधी मैदान जैसे इलाके में होने के कारण बड़ी संख्या में दर्शक इसे देख सकेंगे। बापू सभागार और ज्ञान भवन के बीच से सभ्यता द्वार का दृश्य मनमोहक लगता है। इसके पहले राजधानी के लोगों को बुद्ध स्मृति पार्क, राजधानीवाटिका, बापू सभागार, बिहार म्यूजियम, ज्ञान भवन जैसे कई बेहतरीन पर्यटन केंद्रों का तोहफा मिला है। सभ्यता द्वार का निर्माण कार्य पिछले डेढ़-दो साल से लगातार हो रहा है।

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सभ्यता द्वार बिहार को गौरव दिलाने वाले महापुरुषों की याद दिलाएगा। द्वार पर बिहार से जुड़े छह महापुरुषों की वाणी उकेरी जाएगी। इसमें बौद्ध धर्म के प्रवर्तक महात्मा बुद्ध, जैन धर्म के 24वें तीर्थकर भगवान महावीर, सिख धर्म के प्रथम गुरु गुरुनानक देव, सिख धर्म के 10वें व अंतिम गुरु गोविद सिह, सम्राट अशोक और बादशाह शेरशाह सूरी शामिल हैं। सभ्यता द्वार के छह ओर महापुरुषों की बातें लिखी जाएंगी। फिलहाल इसके लिए जगह छोड़ी हुई है।

सभ्यता द्वार तक पहुंचने के लिए गंगा किनारे खूबसूरत पथ बनाया जाएगा। इसके लिए बासघाट से लेकर कलेक्ट्रेट घाट तक गगा तट को विकसित करने की योजना बनी है। पानी के पर्दे पर साउंड एंड लेजर शो भी चलेगा। विभागीय अधिकारी सभ्यता द्वार के साथ और भी कई आकर्षक चीजें बढ़ाने की योजना पर काम कर रहे है।