बिहार के जमुई जिले से कोरोना के बहाने लाखों रूपये प्रतिदिन के घोटाले की खबर आई है | स्थानीय लोगों अनुसार अधिकारीयों ने जमुई के एक गाँव मे क्वारंटाइन सेंटर के नाम पर 20 लोगों के रासन तथा रहने के खर्चे सरकार से लिये जा रहे हैं |

घटना जमुई जिले के कोल्हुआ पंचायत के उच्च विद्यालय धोबघट की है | यहाँ अब तक एक भी प्रवासी मजदूर को नहीं रखा गया है | परन्तु 20 लोगों की क्वारंटाइन अवधी को पूर्ण बताकर उनके रसद तथा विदाई की रकम सरकार से ले ली गयी है |

प्रधानाध्यापक ने लिखा पत्र 

इस विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने कामता प्रसाद ने इसके लिए अंचलाधिकारी को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है। प्रधानाध्यापक ने अपने पत्र में लिखा है- आज तक इस केंद्र पर एक भी प्रवासी का आगमन नहीं हुआ है। बावजूद प्रखंड क्वारंटाइन सेंटर से संबंधित दैनिक प्रतिवेदन में उच्च विद्यालय धोबघट सेंटर के नाम पर 20 प्रवासी को पंजीकृत दिखाया गया। प्रतिवेदन में 28 मई को सभी पंजीकृत प्रवासी अवधि पूर्ण कर कैंप से घर जाने की रिपोर्ट दर्शाई गई है, जबकि इस विद्यालय में आज तक एक भी प्रवासी नहीं ठहरा है।

हालाँकि जिलाधिकारी महोदय ने ये वादा किया है कि वो इस मामले पर जल्द से जल्द कार्यवाही करेंगे, पर ये तो आनेवाला समय ही बताएगा की ये कार्यवाही कितनी जल्दी की जाती है तथा घोटाले करने वालों को क्या सजा मिलती है |  

पहला ऐसे मामला 

यह अभी तक का पहला आधिकारिक मामला है | बिहार मे वैसे इस तरह के कई फर्जी क्वारंटाइन सेंटर होने की आशंका जताई जा रही है | कोरोना एक वैश्विक महामारी है, और ऐसे समय मे भी सिर्फ अपने बारे मे सोचने वाले लोगों की मानसिकता के तो क्या ही कहने, समस्या तो तब आ खड़ी होती है जब सरकार भी इन्हें मूकदर्शक बनी देखती रहती है | 

बिहार मे 15 सालों से सत्ता मे काबिज नितीश सरकार को लगता है कि सरकारी कोष से पैसे निकाल देने भर से ही जनता की सारी समस्याएं दूर हो जाएँगी | सरकार की जवाबदेही जनता की तरफ होती है पर ऐसा लगता है सरकार किसी भी तरह की जिम्मेदारी लेने से बच रही है | जनता के जीवन या मृत्यु की परवाह किये बिना ही सरकार कोई भी फैसला ले रही है |