George Fernandes

1974 की रेल हड़ताल के बाद वह कद्दावर नेता के तौर पर उभरे जॉर्ज फर्नांडिस। उन्होंने बेबाकी के साथ इमर्जेंसी लगाए जाने का विरोध किया था। रक्षा मंत्री, रेल मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों को संभालने वाले जॉर्ज का जीवन और राजनीतिक करियर विद्रोह, बगावत, विवाद और सफलता का बेमिसाल उदाहरण है।

जार्ज फर्नांडिस अपने परिवार के साथ ओडिशा में थे, जब उन्हें रेडियो के जरिए आपातकाल की सूचना मिली| इसके बाद वो अपने पत्नी और बच्चों से अलग होकर आपातकाल के खिलाफ आंदोलन का हिस्सा बने| फर्नांडिस कभी मछुआरा बनकर तो कभी साधु का रूप धारण कर देश में अलग-अलग हिस्सों में घूमते रहे| इतना ही नहीं उन्होंने अपने बाल और दाढ़ी इतने बढ़ा लिए और सिख बनकर आपातकाल के खिलाफ आंदोलन को धार देने लगे|

फर्नांडिस देश की तमाम सुरक्षा एजेंसियों से छिपकर अपने मिशन पर लगे रहे. इसी दौरान उन्होंने जनता के नाम एक अपील भी जारी की थी| आरोप है कि आपातकाल की घोषणा के बाद से ही जॉर्ज फर्नांडिस देश के अलग-अलग हिस्से में डायनामाइट लगाकर विस्फोट और विध्वंस करना चाहते थे| 

इसके लिए ज्यादातर डायनामाइट गुजरात के बड़ौदा से आया पर दूसरे राज्यों से भी इसका इंतजाम किया गया था| इसी बाद फर्नांडिस  और उनके साथियों को जून 1976 में गिरफ्तार कर लिया गया| इन सभी लोगों पर सीबीआई ने मामला दर्ज किया, जिसे बड़ौदा डायनामाइट केस कहा जाता है|

आपातकाल के दौरान गिरफ्तारी से बचने के लिए जार्ज फर्नांडिस को पगड़ी पहन और दाढ़ी रखकर सिख का भेष धारण किया था जबकि गिरफ्तारी के बाद तिहाड़ जेल में कैदियों को गीता के श्लोक सुनाते थे। फर्नांडिस 8 से अधिक भाषाओं को जानते थे और उन्हें हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और कन्नड़ जैसी भाषाओं के साहित्य का अच्छा ज्ञान था। फर्नांडिस के साथ जेल में रहे विजय नारायण ने बताया था, हम न सिर्फ छिप रहे थे, बल्कि अपना काम भी कर रहे थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए जार्ज ने पगड़ी और दाढ़ी के साथ एक सिख का भेष धारण किया था। वह मशहूर लेखक के नाम पर खुद को खुशवंत सिंह कहा करते थे।

फर्नांडिस अपने शुरुआती दौर से ही जबरदस्त विद्रोही नेता के तौर पर रहे हैं| राम मनोहर लोहिया को वो अपना आदर्श मानते थे| सोशलिस्ट पार्टी और ट्रेड यूनियन आंदोलन के में फर्नांडिस बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते थे| वो अपने तेवर के जरिए 1950 तक वह टैक्सी ड्राइवर यूनियन के नेता बन गए थे| वह धीरे-धीरे गरीबों की आवाज बन गए थे|

इसके बाद फर्नांडिस 1973 में ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के अध्यक्ष बने| इसके बाद सरकार रेलवे के कर्मचारियों की मांग लेकर देशव्यापी हड़ताल कर रेलवे का चक्का जाम कर दिया था| इससे देश में रेलवे का संचालन पूरी तरह से ठप हो गया था|

फर्नांडिस ने 1977 का लोकसभा चुनाव जेल में रहते हुए ही बिहार के मुजफ्फरपुर लोकसभा सीट से रेकॉर्ड मतों से जीता था। जनता पार्टी की सरकार में उद्योग मंत्री भी बने। हालांकि जल्द ही जनता पार्टी टूटी और फर्नांडिस ने अपनी पार्टी समता पार्टी बनाई। इसी दौर में वह वर्तमान बीजेपी के नेताओं के अधिक करीब आए। फर्नांडिस ने अपने राजनीतिक जीवन में उद्योग, रेल और रक्षा मंत्रालय संभाला। वाजपेयी सरकार में परमाणु परीक्षण के वक्त वह रक्षा मंत्री थे। बतौर रेल मंत्री उन्हें कोंकण रेलवे को शुरू करने का भी श्रेय दिया जाता है।