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आज बिहार के करीब 3.5 लाख नियोजित शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. अदालत ने बिहार सरकार की अपील मंजूर करते हुए पटना हाई कोर्ट के फैसले को निरस्त कर दिया है. हाई कोर्ट ने 2017 में समान काम के लिए समान वेतन की मांग को लेकर आंदोलनरत शिक्षकों के हक में फैसला सुनाया था, और कहा था की राज्य सरकार शिक्षकों को बढ़ा हुआ वेतन साल 2010 से लागू करे. जिसके खिलाफ प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार ने कहा की हाईकोर्ट के फैसले से सरकार पर 50 हज़ार करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा.

दरअसल इस फैसले को लेकर लाखों शिक्षकों की निगाहें दिल्ली पर टिकी थीं और बिहार के नियोजित शिक्षकों के कई नेता भी दिल्ली में  कैंप कर रहे थे. आपको बता दें कि शिक्षकों से जुड़े इस बड़े फैसले में जस्टिस अभय मनोहर सप्रे और जस्टिस उदय उमेश ललित की बेंच ने अंतिम सुनवाई पिछले साल 3 अक्टूबर को की थी, जिसके बाद से फैसला सुरक्षित रखा गया था. शिक्षकों की तरफ से कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे वकीलों ने कोर्ट में बहस की थी.

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सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का सीधा असर बिहार के 3.5 लाख शिक्षकों और उनके परिवार वालों पर पड़ेगा. बिहार के नियोजित शिक्षकों का वेतन फिलहाल 22 से 25 हजार है और अगर कोर्ट का फैसला शिक्षकों के पक्ष मे आता, तो माना जा रहा था कि उनका वेतन 35-40 हजार रुपये हो जाती. शिक्षकों की इस लड़ाई में देश के दिग्गज वकीलों ने उनका पक्ष कोर्ट में रखा.

आपको बता दें की शिक्षकों की ये लड़ाई 10 साल पुरानी है, जब 2009 में बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने बिहार में नियोजित शिक्षकों के लिए समान काम समान वेतन की मांग पर एक याचिका पटना हाइकोर्ट में दाखिल की थी.