बिहार मे पेट्रोल व डीजल के बढ़ते कीमतों के बीच राजनीति एक बार फिर गरम है | कोरोना वायरस महामारी के बीच इसी साल बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं। जहां जदयू-भाजपा गठबंधन जोर-शोर से चुनाव की तैयारियों मे लगा है वहीं विपक्ष भी सत्ता पक्ष की आलोचना का कोई मौका हाथ से जाने नहीं दे रहा है |

बढ़ती कीमतों के विरुद्ध प्रदर्शन मे साईकल पर निकले तेजस्वी  

मुख्य विपक्षी दल राजद द्वारा कोरोना को लेकर नीतीश सरकार पर लगातार हमला बोलने के बाद गुरुवार को राजद नेताओं ने पटना में पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों के खिलाफ साइकिल मार्च निकाला।राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेताओं तेजस्वी यादव, तेजप्रताप यादव और पार्टी कार्यकर्ताओं ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि के विरोध के रूप में साइकिल की सवारी की। 

कीमतों मे हुई थी वृद्धि 

ग़ौरतलब है कि गुरुवार को देश में लगातार 19वें दिन पेट्रोल-डीजल की कीमत में बढ़ोतरी हुई। तेल विपणन कंपनियों (ओएसमी) ने कीमतों में बढ़ोतरी की है। यहां देखने वाली बात यह है कि राजधानी दिल्ली में डीजल की कीमत पेट्रोल से ज्यादा हो गई है। पिछले 19 दिनों में डीजल की कीमत कुल 10.63 रुपये प्रति लीटर बढ़ी है और पेट्रोल 8.66 रुपये प्रति लीटर महँगा हुआ है।

कांग्रेस सरकार से तुलना 

अब जब की भाजपा की सरकार केंद्र मे है तो तेल की बढती कीमतों के लिये केंद्र सरकार की नीतियों को ही जिम्मेदार ठहराया जाएगा | केंद्र मे जिस समय मे भाजपा की सरकार बनी थी उस समय पेट्रोल की कीमत 56 रूपये के आसपास थी | तेल के दाम का 56 रूपये से लेकर आज 80 रूपये का सफ़र सोचनीय है | हालत तब और गंभीर मालूम पड़ती है जब हम ये देखते हैं कि ये वृद्धि सिर्फ पिछले 6 सालों मे आई है |

पेट्रोलियम उत्पादों पर सबसे ज्यादा टैक्स वसूलती है भारत सरकार

भारत पुरे विश्व मे पेट्रोलियम पर सबसे ज्यादा कर वसूलने वाला देश है | हर वक़्त पाकिस्तान से तुलना करने वाला मीडिया इस वक़्त खामोश है क्यूँकि वहां भी भारत से कम टैक्स ही वसूला जाता है | ऐसे वक़्त मे जब भारत की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा रही है तथा लोगों के पास खर्च करने को पैसे नहीं हैं तब हर बड़े अर्थशास्त्री का यही मानना है कि सरकार को पेट्रोलियम पर टैक्स मे कमी करनी चाहिए | 

इससे लोगों के हाथ मे पैसे आयेंगे तथा लोग ज्यादा खर्च करेंगे | यह अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने मे काफी मददगार साबित हो सकती है |