सवर्ण आरक्षण – क्या मोदी सरकार के लिये ‘गेम चेंजर’ फैसला हो सकता है?

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सवर्ण जातियों के लिए शिक्षा और नौकरियों में दस फ़ीसदी आरक्षण देने का नरेन्द्र मोदी सरकार का फ़ैसला एक तीर से कई निशाने साधता है|

Narendra Modi - Reservation for Upper Castes

लोकसभा चुनाव में अब 100 दिन से भी कम बचे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने सामान्य श्रेणी में आर्थिक रूप से पिछड़ों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी दे दी है। लोकसभा चुनाव के नज़रिए से सरकार का यह क़दम गेम चेंजर साबित हो सकता है| मोदी ने अपने इस क़दम से अपने राजनीतिक विरोधियों को सकते में डाल दिया है| उनके लिए सरकार के इस क़दम का समर्थन और विरोध, दोनों ही करना कठिन हो जाएगा|

मोदी ने इस तरह से लोकसभा चुनाव से पहले एक बड़ा दांव खेला हैं| लेकिन इसको लेकर सरकार की नीयत पर भी अंगुलियां उठने लगी हैं। खासकर इसके टाइमिंग को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इसकी घोषणा कर मोदी सरकार वाहवाही तो लूट सकती हैं, लेकिन इसे किसी भी तरह से लोकसभा चुनाव से पहले धरातल पर लाना उतना आसान नहीं होगा|

पहली बात तो यह कि मंगलवार को मौजूद सत्र का आखिरी दिन है। इसलिए यह संभव नहीं कि विधेयक (संशोधन) को दोनों सदनों में पारित किया जा सके। दूसरी बात राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं है, अत: यह विधेयक वहां लटक सकता है। जानकारों की मानें तो यह घोषणा मोदी सरकार का सिर्फ चुनावी ‘जुमला’ साबित हो सकता है।

कई ऐसे क्षेत्रीय दल हैं जिसमें बहुजन समाज पार्टी भी शामिल है, जो पिछले कई सालों से ग़रीब सवर्णों को आरक्षण देने की मांग करती रही हैं| इन सबके लिए चुनाव के समय इस संविधान संशोधन विधेयक का विरोध करना संभव नहीं होगा| ऐसे समय जब सारे देश में राम जन्म भूमि की चर्चा हो रही है, मोदी ने नया दांव चल दिया है| अब सवर्ण आरक्षण का यह मुद्दा चुनाव तक राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में रह सकता है|

Reservation for Upper Castes

राम मंदिर के मुद्दे पर जो लोग सक्रिय थे उनमें सवर्णों की संख्या ही ज़्यादा थी| सरकार के इस क़दम से अनुसूचित जाति/ जनजाति के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला बदलने से सवर्णों में उपजी नाराज़गी काफ़ी हद तक कम होगी| मध्य प्रदेश और राजस्थान में हुए विगत विधानसभा चुनावों में भाजपा को इसकी भारी क़ीमत चुकानी पड़ी थी|

इस आरक्षण से क्या बदलेगा?

Reservation for Upper Castes

आरक्षण की सीमा 49.5 फ़ीसदी से बढ़ाकर 59.5 फीसदी करने से किसी से कुछ छीना नहीं जा रहा, इसलिए दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों में अगड़ों को मिलने वाले आरक्षण से कोई नाराज़गी नहीं होगी|

साथ ही सवर्णों में आर्थिक रूप से कमज़ोर तबक़े की शिकायत भी दूर होगी| उसे लगता था कि केवल जाति के कारण उसकी ग़रीबी को ग़रीबी नहीं माना जाता|

जानें आखिर सवर्णों में किसे-किसे ये आरक्षण मिल सकता है:

  • जिसकी सलाना आय 8 लाख रुपए या इससे कम है
  • जिसके पास 5 एकड़ या उससे कम खेती जमीन है
  • जिसका 1000 वर्ग फुट से कम जमीन पर मकान है
  • कस्बों में 200 गज जमीन वालों को, शहरों में 100 गज जमीन वालों को
  • राजपूत, ब्राह्मण, कायस्थ, भूमिहार, बनिया, जाट, गुर्जर को इस श्रेणी में आरक्षण मिलेगा
  • आरक्षण शिक्षा (सरकार या प्राइवेट), सार्वजनिक रोजगार में इसका लाभ मिलेगा
  • इसके लिए संविधान के अनुच्‍छेद 15 और 16 में संशोधन होगा
  • आरक्षण आर्थिक रूप से पिछड़े ऐसे गरीब लोगों को दिया जाएगा जिन्हें अभी आरक्षण का फायदा नहीं मिल रहा है

आरक्षण का लाभ उठाने के लिए आपको आय प्रमाण पत्र दिखाना होगा| इसके अलावा जाति प्रमाण पत्र, बीपीएल कार्ड, आधार कार्ड, बैंक पास बुक, इनकम टैक्स रिटर्न और पैन कार्ड भी दिखाना होगा|

Reservation for Upper Castes

मोदी सरकार के इस क़दम से अगड़ी जातियों में पूरी आरक्षण व्यवस्था को लेकर पनप रहे अंसतोष पर थोड़ा पानी पड़ेगा|

भाजपा के अंदर भी सवर्णों के एक वर्ग को इस बात का गिला था कि प्रधानमंत्री हर समय पिछड़ों और दलितों की बात करते हैं| सवर्णों के वोट भाजपा को मिलते हैं पर पार्टी और सरकार उनके बारे में कुछ सोचती नहीं|

इस संविधान संशोधन विधेयक का हश्र कुछ भी हो लेकिन यह तो तय है कि यह मुद्दा लोकसभा चुनाव के प्रमुख मुद्दों में एक होगा| सरकार का यह दांव कितना कारगर साबित होगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन सरकार के इस दांव से विपक्षी खेमे में बेचैनी साफ देखी जा रही है। नहीं पास हुआ तो पार्टी विक्टिम कार्ड खेलेगी| ऐसे में यह मतदाता पर निर्भर है कि वो इसे मोदी सरकार का चुनावी स्टंट मानता है या सही नीयत से किया गया फ़ैसला|

(With Inputs from BBC Hindi)

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