देवशिल्पी_भगवान_विश्वकर्मा

आज १७ सितम्बर को विश्वकर्मा पूजा है| वही विश्वकर्मा जिन्हें हिन्दू शास्त्रों के अनुसार संसार का शिल्पी माना जाता है| हिन्दू धर्म में प्रत्येक पर्व और त्यौहार तिथि के अनुसार मनाया जाता है, जो चन्द्र पञ्चांग पर आधारित होता है| लेकिन विश्वकर्मा पूजा एक अपवाद है, जिसकी तिथि सूर्य को देखकर किया जाता है, यही कारण है की इस पूजा की तिथि हर साल १७ सितम्बर को होती है|

पूजा का मुहूर्त – सुबह 07:01 मिनट से

विश्वकर्मा पूजा विशेषकर बिहार, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, एवं दिल्ली आदि राज्यों में धूम धाम से मनाया जाता है| भगवन विश्वकर्मा की भव्य मूर्ति स्थापित करके उनकी आराधना की जाती है| कई स्थान पर इसे कन्या संक्रांति भी कहते हैं|

विश्वकर्मा पूजा को लेकर हिन्दू धर्म में कुछ मान्यताएं हैं| कुछ ज्योतिषाचार्यों के अनुसार भगवान विश्वकर्मा का जन्म आश्विन कृष्णपक्ष के प्रतिपदा तिथि को हुआ था| अन्य मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद की अंतिम तिथि भगवन विश्वकर्मा की पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ है|

VishwakarmaPuja

निर्माण और सृजन के देवता के रूप में विश्वकर्मा जी की प्रतिष्ठा है| भगवान ब्रह्मा के निर्देशानुसार, विश्वकर्मा जी ने ही पृथ्वी को मनुष्यों के रहने के लायक बनाया| इतना ही नहीं देवताओं के वास के लिए स्वर्ग लोक, कृष्णा की नगरी द्वारका, भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, तथा शिव जी का त्रिशूल ये सब भी विश्वकर्मा भगवान की ही कृति है| इसके अलावा रावण की लंका, पांडवों की राजधानी इन्द्रप्रस्थ, और जगन्नाथ पूरी के मुख्य मंदिर का निर्माण भी भगवान विश्वकर्मा ने ही किया था|

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यही कारण है की निर्माण और कौशल से जुड़े लोग भगवान विश्वकर्मा को अपना ईष्ट देव मानते हैं और उनकी पूजा करते हैं| विश्वकर्मा पूजा के दिन फैक्ट्री, वर्कशॉप, शिल्पी एवं अन्य सभी लोग जो किसी न किसी प्रकार से मशीन या शिल्पकला से जुड़े हैं, वहां इनकी पूजा होती है|

आम लोग भी विश्वकर्मा पूजा के दिन अपने घरों में वाहनों और मशीन की पूजा करते हैं| मान्यता है की विश्वकर्मा की पूजा करने से वाहनों से यात्रा करना सुरक्षित हो जाता है| यही कारण है की बस और ट्रकों पर भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर होती है|